ये कहानी मेरी माँ, मोहिनी के बारे में है – 40 साल की उम्र, फिगर 42-34-44, बड़े-बड़े रसीले चूचे, मोटी गांड, और एक ऐसा बदन जो किसी के भी लंड को खड़ा कर दे। एक रात, पार्टी से शराब के नशे में धुत होकर घर आई, और इंस्टीट्यूट के एक लड़के ने उनको छोड़ने के बहाने घर के नीचे सीढ़ियों के पास चुदाई कर दी – और मैंने ये सब अपनी आंखों से देखा!
जैसा आप जानते हैं कि माँ इंस्टीट्यूट में पढ़ती थी, और उनका एक बड़ा सामाजिक दायरा था – शिक्षक, छात्र, और स्थानीय लोगों के साथ पार्टियाँ और मिलन समारोह। एक शनिवार की रात, संस्थान के एक सहकर्मी ने अपने घर पर बड़ी पार्टी राखी संगीत, नृत्य, और दारू का दौर।
माँ सुबह से उत्साहित थी – अन्होन एक टाइट ब्लैक ड्रेस पेहनी, स्लीवलेस, डीप नेक, चुचियाँ उभर के दिख रही थी, गांड ड्रेस में टाइट और मटकती। हाई हील्स, लाल लिपस्टिक, काजल, और बाल खुले – माँ एकदम रंडी जैसी लग रही थी। मैंने बोला, “माँ, ये ड्रेस थोड़ी बोल्ड नहीं है?” माँ ने नखरा दिखाया, “अरे अंकुर, तू भी ना – मैं जवान हूं, थोड़ी मस्ती करूंगी तो क्या बुरा है?” पर उनकी आँखों में एक शरारती चमक थी – उनकी निम्फो नेचर शायद पार्टी में कोई खेल खेलने का प्लान बना रही थी। वो शाम 7 बजे पार्टी के लिए निकल गई, और मैंने सोचा रात 11 बजे तक वापस आ जाएगी।
रात 1 बज गया – माँ अभी तक नहीं आई। मैंने फोन किया, पर उन्हें पिक नहीं किया। दिल में बेचैन थी – मैं घर के नीचे, बिल्डिंग के एंट्रेंस पे, उनका इंतज़ार करने गया। हमारी बिल्डिंग पुरानी थी – नीचे एक छोटी सी सीढ़ी थी, थोड़ी सी अंधेरी जगह, जहां लोग अक्सर सिगरेट पीते थे। मैं वहां खड़ा था जब एक ऑटो रुका – मां हमसे उतरी, और साथ में एक लड़का था, इंस्टीट्यूट का स्टूडेंट, नाम समीर, 19 साल का, लंबा, गोरा, मस्कुलर, जींस और टी-शर्ट में। माँ पूरी नशे में थी – लड़खड़ाती हुई, ड्रेस सरकी हुई, चुचियाँ आधी बाहर, लिपस्टिक ख़राब – और समीर उनको सहारा दे रहा था।
मैं थोड़ी दूर खड़ा था, अँधेरे में, और देखा कि माँ समीर के साथ सीढ़ी के पास रुक गई। माँ ने समीर का हाथ पकड़ा, और नशे में बोली, “समीर, तू कितना मीठा है – मुझे घर तक छोड़ने आया!” समीर ने शरारती मुस्कान दी, “मैम, आप इतनी हॉट हो – पार्टी में सब आपको घूर रहे थे!” माँ ने नखरा दिखाया, “अरे चुप, मैं तेरी टीचर हूँ – ये सब मत बोल, गंदा लड़का!” पर उनकी आवाज में एक आकर्षक लहजा था – उनकी चूत शायद नशे और समीर के जोश से गीली हो रही थी।
माँ ने अचानक समीर की जींस के ऊपर हाथ रखा – ज़मीन पर दबाया – और धीरे से हिलाने लगी, “समीर, ये क्या छुपा रखा है – दिखाओ तो ज़रा!” समीर का मुँह खुला रह गया, पर उसका लंड झट से खड़ा हो गया, “मैम, ये क्या कर रही हो – कोई देख लेगा!” माँ ने जंगली मुस्कान दी, “चुप कुत्ता, यहाँ अँधेरा है – कोई नहीं देखेगा। तेरा लंड मेरी हाथ में दे!” उसने समीर की जींस का ज़िप खोला – लंड बाहर निकला, 7 इंच का, मोटा, सुपाड़ा लाल – और तेजी से हिलाने लगी। माँ सिसकियाँ ले रही थी, “आह, समीर, तेरा लंड तो एकदम मस्त है – इसको मजा दूंगी!”
मैं अँधेरे में छुप के ये सब देख रहा था – दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था, पर मैं हिला नहीं – माँ की निम्फ़ो रूप देख के शॉक और अजीब सी गर्मी दोनों थी। समीर ने माँ के चूचे ड्रेस के ऊपर से दबाये, “मैडम, तेरी चुचियाँ तो एकदम बम हैं – दबाने दे! अह्ह्ह्हह” माँ ने नखरा किया, “अरे हरामी, धीरे – मेरी चुचियाँ दर्द दे रही हैं! कड़क हाथ है तेरे” पर वो उसके हाथों को और ज़ोर से दबा रही थी – उनकी चूत रस से भर गयी.
समीर का जोश बढ़ गया – उसने माँ को सीढ़ियों के नीचे, अंधेरी दीवार के सहारे दबा लिया। माँ की ड्रेस ऊपर उठाई – पैंटी नीचे सरका दी – उनकी चूत गीली, चमक रही थी। माँ ने नखरा दिखाया, “समीर, ये क्या गंदगी है – मैं तेरी मैडम हूँ, मुझे यहाँ मत छोड़! सेल कोई देख लगी” पर उनकी आँखें मजे से चमक रही थी – वो दर्द और चुदाई चाहती थी। समीर ने बोला, “चुप रंडी, तू नशे में मेरी गुलाम है – तेरी चूत का भोसड़ा बनाऊंगा! रंडी खुद मेरा लंड पकड़ा, आग भड़काया और अभी सती बन रही है” उसने अपना लंड माँ की चूत पर रखा – एक ज़ोरदार धक्का मारा – पूरा 7 इंच का लंड अंदर घुस गया।
माँ चीख उठी, “आह, समीर, मेरी चूत फट गयी – धीरे करो अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह!” पर ये भूलभुलैया की गाल थी – उनकी निम्फो नेचर दर्द में ख़ुशी पा रही थी। समीर ने तेजी से धक्के मारने शुरू किये – थप-थप-थप की आवाज सीढ़ियों के नीचे गूँज रही थी, अँधेरा उनको छुपा रहा था। माँ सिसकियाँ ले रही थी, “आह, समीर, मेरी चूत जल रही है – और ज़ोर से पेल, मुझे दर्द चाहिए! और ज़ोर से कर” समीर ने उनकी ड्रेस ऊपर खींच दी – चुचियाँ नंगी हो गई – और ज़ोर से दबने लगा, “साली, तेरी चुचियाँ एकदम टाइट हैं, जबसे देखा है तुझे रोज़ तेरे नाम का मुँह मारा है रंडी आह्ह, आज मौका मिला है… इसे चोदूंगा कि मजा आ जाएगा रंडी!”
मैं चुपके से देख रहा था – दिल में बेचैनी, पर जोड़ी जैसे ज़मीन से चिपके हुए थे। माँ की ड्रेस अब कमर तक सरकी हुई थी, गांड नंगी, चुचियाँ समीर के हाथों में। वो बोली, “आह, समीर, तेरा लंड मेरी चूत को फाड़ रहा है – और ज़ोर से, हरामी!” समीर ने उनकी गांड पर थप्पड़ मारा – लाल निशान बन गया – और बोला, “रंडी, तू एकदम निम्फो है – तेरी चूत मेरा लंड खा रही है!” 15 मिनट तक ये चला – माँ का बदन पसीने से गीला, चूत रस से भारी।
समीर ने माँ को सीढ़ियाँ के नीचे घोड़ी बनाया – उनकी मोटी गांड हवा में थी, टाइट, चमक रही थी। उसने लंड फिर से चूत पे रखा – एक और ज़ोरदार धक्का मारा – माँ सिसकियाँ ले रही थी, “आहह समीर तेरा लंड मेरी चूत को और गहरा कह रहा है, ज़ोर ज़ोर से चोद” समीर ने उनके बाल पकड़ लिए – जैसे कोई घोड़ी की लगाम – और तेजी से चोदना शुरू किया. थप-थप-थप की आवाज़ अब और तेज़ थी – माँ की चुचियाँ लटक के हिल रही थी, गांड पर समीर के थप्पड़ों के निशान।
माँ बोली, “आह, समीर, मेरी गांड दर्द दे रही है – और थप्पड़ मार, मुझे मज़ा आ रहा है!” समीर ने उनकी गांड पे ज़ोर से थप्पड़ मारे – लाल हो गयी – और बोला, “साली, तू एकदम जंगली रंडी है – तेरी चूत का भोसड़ा बना दूंगा!” माँ का चरमसुख आया – उनकी चूत से रस तपाक-तपक के ज़मीन पे गिरा – वो चिल्लाई, “आह, समीर, मैं झड़ गई – और चोद, हरामी!” समीर ने 10 मिनट और घोड़ी स्टाइल में चोदा – माँ का बदन कम्प रहा था, पर वो मजे में डूबी थी।
समीर ने मां को घुटनो के बाल बिठाया – उनकी ड्रेस फटी हुई, चुचियां नंगी, चेहरा पसीना और नशे से गीला। उसने अपना लंड माँ के मुँह के सामने रखा – थूक और रस से गीला – और बोला, “चूस रंडी, तेरा मुँह मेरा लंड लेगा! अपनी चूत के झड़े का माल चूस, मेरे लंड को चाट के साफ कर” माँ ने नखरा दिखाया, “अरे समीर, ये गंदा है – मैं तेरा लंड नहीं चुनूंगी! मेरी मलाई माई ही चुसु कुत्ते” पर वो झट से मुँह खोल के लंड गले तक ले गई – जीब से सुपाड़ा चूसने लगी – माँ सिसकियाँ ले रही थी, “आह, समीर, तेरा लंड कितना प्यारा है और मेरे माल का स्वाद तो सोने पे सुहागा है”। माँ ने उसके लंड को हाथ में पकड़ा और हिलाने लगी और लंड को कुल्फी की तरह चूसने लगी।
समीर ने माँ के बाल पकड़ लिए – मुँह में लंड तेजी से अंदर-बाहर किया – माँ का गला दब रहा था, पर वो मजे ले रही थी, “आह, समीर, ऊऊओप्प्प्प ओप्प्प्प्प्प्प्प अह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है अह्ह्ह्ह मगर रुक मत,,, अह्ह्ह्ह ज़ोर से!” 5 मिनट तक मुँह चुदाई के बाद, समीर ने माँ को फिर से दीवार के सहारे लिटाया – उनकी टांगें चोदी – और चूत में लंड पेल दिया। माँ बोली, “आह, समीर, मेरी चूत अभी भी तेरा लंड खा रही है – फाड़ दे इसको!” समीर ने तेज़ी से चोदा – 10 मिनट तक थप-थप-थप – और आख़िर में अपनी मल माँ की चूत में छोड़ दिया – रस इतना था कि चूत से तपक-टपक के ज़मीन पे गिर गया।
माँ हांफते हुए बोली, “आह, समीर, तेरा माल मेरी चूत भर दिया – तू एकदम दमदार है!” समीर ने उनकी गांड पर एक आखिरी थप्पड़ मारा, “मैडम, तू एकदम निम्फ़ो रंडी है – कभी भी चोदने आ जाऊंगा!”
समीर के पास फोन आया और वो बोला, “चल जा रंडी मेरे घर से कॉल आ रहा है, ऊपर चली जाना, पता चले कि किसी और के कमरे में चली जाए और चूत मारवा ले अपनी”। कह कर समीर चला गया.
समीर ने अपनी जींस पहनी, और माँ ने ड्रेस ठीक की – फटी हुई, गीली, चुचियाँ अभी भी थोड़ी बाहर। वो लड़खड़ाती हुई सीढ़ी से ऊपर चली। माई झट से घर में आ गया क्यों कि अब माँ आने वाली थी। मगर 5 मिनट बीत गये मगर माँ नहीं आयी। माई आला गया मगर माँ वहा भी नहीं थी।
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